सोमवार, 26 मार्च 2012


ये क्या माँगा तुने ऐ फरिस्ते

कल मेरे घर
आया एक नन्हा सा मेहमान
मानो हो कोई देवदूत
यह कहता मुझसे कि
ऐ मेरे बुजुर्ग आपसे
बस इतनी ही है विनती
कि हो सके तो मेरे लिए
इंतजाम करो
कुछ ताजी सी हवा का
कुछ अपनापन लिए हुए रिश्तों का
कुछ अच्छे से सच्चे से ( दिखनेवाला ही सही )
समाज का ,
सोचता हूँ मैं
कि ये क्या मांग लिया
मेरे कुल के नवजात ने,
इससे तो अच्छा होता
गर मांगी होती
मेरी सारी दौलत ,
मेरा सारा प्यार
या फिर मेरा पूरा संसार
मन मरकर ही सही दे तो पता उसे मैं
पर अब क्या कहूँ तुझसे
माफ़ करना नन्हे फरिस्ते
नहीं पूरी कर सकूँगा शायद
मैं तेरी ये छोटी (?) सी चाहत
हो सके तो कुछ और मांग
या फिर मुझे मुह छुपाने
का मौका तो दे दे ऐ मेरे अपने

5 टिप्‍पणियां:

  1. आनेवाला, आनेवाले कल में, खुद ही ढल जायेगा
    छोड़ आज को पीछे भाई,आगे बहुत निकल जायेगा.

    वर्तमान परिवेश का सुंदर चित्रण.

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  2. नवजात के मांग पूरी करने का संकल्प ले... सब...
    यही रास्ता है...

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  3. smt devaki khandeliya se mail par prapt pratikriya:::
    nirash mat ho .hum to kam se kam aisa vatavaran paida kar sakate hai .jab tak bachha hai tab tak sachh hai .bas hamari shuddha drishti men vah apnapan pa hi lega .uski duniya bari khubsurat hai bas sapne saje rahen achhe r sachhe hamari aakhon men

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  4. आज का यह नन्हा मेहमान बहुत आगे निकल जायगा.आप दे या ना दे अपनी किस्मत का वह अवश्य पायगा.

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  5. नन्‍हे की मांग की चुनौतियों का सामना कीजिए। आपसे ही उम्‍मीद है उसे। आप ही हिम्‍मत हारेंगे तो नन्‍हे का क्‍या होगा।

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