बुधवार, 15 नवंबर 2017

गत दिनों एक मित्र से बहुत लंबे अरसे के बाद मुलाकात हुई बहुत सी बातों के बाद परिवार आदि की बातों के बाद एक अन्य पुराने मित्र के बारे में चर्चा चल पड़ी किन्तु यह सुनकर दुख हुआ कि हमारे उस मित्र ने अब लगभग सभी लोगों से अपने रिश्ते समेट लिए हैं वह लगभग किसी से नहीं मिलता । यह जानने के बाद मैंने तय किया कि एक बार जाकर उससे मिला जाए और एक दिन उससे मिलने पहुंच भी गया बड़ी आत्मीयता से उसने मेरा स्वागत किया किन्तु जैसे ही अन्य कुछ मित्रों की चर्चा चली उसका चेहरा एकदम उदास हो गया ऐसा लगा मानो वह किसी के बारे में चर्चा नहीं करना चाहता जब मैंने कारण जानने की जिद की तो उसने जो बताया वह अपने आप में किसी भी स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए पर्याप्त था उसने बताया कि एक मित्र ने उसे अपने पुत्र की शादी में बड़े आग्रह से बुलाया और वह गया भी जैसे ही वह उसके दरवाजे पर पहुंचा वह उसे लेने लपक कर आगे भी आया किन्तु उसी समय उसके कोई प्रभावशाली बिजनेश पार्टनर आ गए और वह उसकी तरफ ध्यान न देकर उस पार्टनर की ओर मुड़ गया और इतना ही नही पूरे विवाह समारोह में उसने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया । यहां तक कि जब वह वापस आने लगा तो भी उसने कोई ध्यान नहीं दिया उसका कहना था कि  ऐसा उसने सिर्फ इस लिये किया कि उसकी स्थिति सामान्य है और वह अपने आप को अपने दोस्तों के साथ एडजस्ट नहीं कर पाता।
उसी समय से विचार कर रहा हूँ कि गलत कौन है। वह मित्र जिसने उसे विवाह समारोह मेँ बुलाने के बाद मित्रोचित व्यवहार नहीं किया या यह मित्र जिसमें सामान्य परिस्थिति का होने के कारण हीन भावना भारी हुई है? क्या उसे इससे बाहर नहीं आना चाहिए या जिसने किसी एक के व्यवहार को अपने उन सभी मित्रों का मान लिया जिनके साथ उसके बचपन के सुनहरे क्षण बीते थे

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