मेरी कामना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मेरी कामना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

हे प्रभु मेरी कामना बनी रहे

वो जिसे समझा गया था रहनुमा
क्या निकला पता नहीं
हाँ इतना जनता हूँ कि
मेरे सारे सपने टूट गए
बिखर कर राह गयी
सारी की सारी उम्मीदें
सोचता हूँ क्या गलती थी मेरी
सिवाय इसके कि मैंने विश्वाश
किया था रिश्तों पर
नभाना चाहा था अपनी
परंपरा को ,
किन्तु खंडित हो गया मेरा
विश्वाश चढ़ गया सूली पर
आजके भौतिकतावादी जीवन की
किन्तु सुबह जब देखा सूरज को तो
लगा नहीं अभी भी नहीं टूटी है
रिश्तों की डोर
क्योंकि आज भी सूरज लेकर
आया है एक नई रोशनी
एक नया विश्वाश
और एक नयी आश कि
जब तक दुनिया है मेरे वतन में
रिश्तों की डोर टूट नहीं सकती
कभी भी कंही भी